रविवार, जुलाई 18, 2010

पतला होना चाहते हैं क्या आप ?


पतला होने की तमन्ना रखने वाले मोटे लोगों के लिए यह अच्छी खबर है। खासकर वे जो वजन घटाने के लिए ज्यादा मेहनत करने के बजाय कोई क्विकफिक्स तरीका ढूंढते हैं। साइंटिस्टों का दावा है कि उन्होंने एक ऐसी फोर-इन-वन गोली तैयार कर ली है, जो न सिर्फ वजन घटाएगी, बल्कि मोटे लोगों का ब्लड प्रेशर कंट्रोल करेगी, कॉलेस्ट्रॉल का लेवल सही रखेगी और डायबीटीज से भी उनकी रक्षा करेगी। बाजार में आने में इसे तीन साल लगेंगे। वैज्ञानिक इसे डायट ड्रग कह रहे हैं, जिसका नाम है लाइरग्लूटाइड। डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस दवाई में फील गुड फैक्टर है। इसका स्ट्रक्चर ठीक गट हॉरमोन की तरह है, जो भूख को कंट्रोल करता है। यह दवाई सीधे ब्रेन को यह मेसेज पहुंचाती है कि पेट भरा हुआ है। बेशक आपने अपनी भूख से 20 फीसदी खाना कम खाया हो, लेकिन आपको पेट पूरी तरह से भरा हुआ महसूस होने लगेगा।
वैज्ञानिकों ने इस दवा को 550 मोटे पुरुषों और महिलाओं पर टेस्ट किया। इसके तहत कुछ को रोजाना एक लाइराग्लूटाइड दी जा रही थी, जबकि कुछ को इसकी जैसी दिखने वाली बेअसर डमी दवा। नतीजा देखा गया कि लाइराग्लूटाइड लेने वालों ने छह महीने में करीब डेढ़ किलो वजन घटा लिया, जो डमी दवा खाने वालों से दोगुना था। जब उन्हें लगातार डेढ़ साल तक लाइराग्लूटाइड दी गई तो उनका वजन वहीं पर स्थिर हो गया, जबकि डमी दवा खाने वालों का वजन तेजी से बढ़ता गया। यह दवा इंसुलिन की तरह इंजेक्शन से ली जाती है। टेस्ट में पाया गया कि इसे रेगुलर तौर पर लेने के बाद बीपी कम करने की दवा अलग से ले रहे लोगों की वह दवा छूट गई। लाइरग्लूटाइड से उनके ब्लड प्रेशर का लेवल काफी गिर गया। ब्लड फैट और कॉलेस्ट्रॉल लेवल भी काफी कम होता देखा गया। नतीजों में यह भी पाया गया कि शरीर के पास शुगर से लड़ने की ताकत इस कदर बदल गई कि जिन्हें डायबीटीज का खतरा था, वह दूर हो गया। साइंटिस्टों के मुताबिक, कई लोग जो इंसुलिन लेते थे, उन्हें इस दवा के सेवन के बाद उसकी जरूरत नहीं पड़ी। ग्लासगो यूनिवसिर्टी के प्रोफेसर माइक लीन ने बताया कि इस दवा को लेने का मतलब यह कतई न लगाया जाए कि मोटे लोगों को डायबीटीज या हार्ट की बीमारी कभी होगी ही नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि आपने घड़ी को उल्टा घुमा दिया है। फिलहाल यह पता नहीं लगाया गया है कि इस दवा को छोड़ने के बाद क्या लोगों का वजन बढ़ेगा या नहीं। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम अपने खाने-पीने की आदतों को सुधार लें तो फिर इस दवा की जरूरत उन्हें नहीं पड़ेगी।

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